हरिद्वार। वशिष्ठ पीठाधीश्वर ब्रह्मर्षि डॉ रामविलास दास वेदांती महाराज ने प्रेमनगर आश्रम हरिद्वार में आयोजित श्रीमद् बाल्मीकिय श्रीरामकथा के पहले दिन ही माता सीता के वन गमन का प्रसंग सुनाते हुए श्रोताओं को भाव विभोर कर दिया।       उन्होंने कहा कि राजा राम के आदेश पर लक्ष्मण ने माता सीता को वन में छोड़ तो दिया। लेकिन अधीर होकर विलाप करने लगे।लक्ष्मण को रोते हुए देखकर सुमंत ने भगवान राम के चरित्र को समझाते हुए लक्ष्मण को कहा कि इतने वर्षों तक राम के साथ रहने पर भी तुमने राम को नहीं पहचाना। मर्यादा की रक्षा के लिए एक दिन तुम्हारा भी परित्याग कर देंगे।
गौरतलब है कि कथा व्यास डॉ रामविलास दास वेदांती महाराज के मुख से हरिद्वार के प्रेमनगर आश्रम में श्रीमद् बाल्मीकिय श्रीरामकथा का गुणगान किया जा रहा है। कथा के पहले ही दिन उन्होंने श्रोताओं के सामने श्रीमद् बाल्मीकिय रामायण के रहस्य को समझाया। उन्होंने कहा वाल्मीकि रामायण मात्र 24 हजार श्लोकों में नीहित नहीं है। अपितु करोड़ों वाल्मीकिय रामायण है। उनकी दिव्य वाणी को सुनकर कथा पंडाल में उपस्थित श्रोतागण भाव विभोर हो गए। कथा व्यास ने उनके अंतर्मन को झकझोर कर रख दिया। वेदांती महाराज ने महर्षि वाल्मीकि के जीवन चरित्र से लेकर लव-कुश के जन्म का वृत्तांत विस्तार से सुनाया। लगातार तीन घंटे तक लोग एकटक कथा सुनते रहे। संगीत के माध्यम से कथा सुनकर लोगों के आनंद का ठिकाना नहीं रहा। इसके पूर्व आयोजकों ओर से व्यासपीठ पर विराजमान डॉ रामविलास वेदांती महाराज का पूजन किया गया। कथा के प्रथम दिवस पर रानीपुर विधायक आदेश चौहान, भारतीय कुश्ती संघ के अध्यक्ष संजय सिंह, डॉ राघवेश दास वेदांती महाराज, डा विशाल गर्ग, रंजीता झा,अपराजिता सिंह, नीलम राय, सीए आशुतोष पांडेय, सुनील सिंह, बृजभूषण तिवारी, अमित गोयल, अमित साही, प्रमोद राय, पं तरूण शुक्ला, संतोष कुमार, सहित बड़ी संख्या लोगों ने कथा में शामिल होकर पुण्य लाभ अर्जित किया। कथा के उपरांत भवानी कला ग्रुप के बच्चों ने सांस्कृतिक कार्यक्रम प्रस्तुत किया। वहीं भारतीय कुश्ती संघ के अध्यक्ष संजय सिंह की ओर से राष्ट्रीय स्तर पर पहचान बनाने वाले खिलाड़ियों को पदक से सम्मानित किया गया।

 

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