-राज्यपाल ने कहा— ‘समृद्ध किसान और आधुनिक तकनीक से बनेगा सशक्त उत्तराखण्ड।
-तकनीक, परंपरा और युवा शक्ति से बदलेगी कृषि की तस्वीर।
-बीज से बाजार तक’ मजबूत होगी श्रृंखला।

पंतनगर मा.राज्यपाल लेफ्टिनेंट (सेनि) जनरल गुरमीत सिंह ने शनिवार को जी.बी.पंत कृषि एवं प्रौद्योगिक विश्वविद्यालय पंतनगर में आयोजित 120वें अखिल भारतीय किसान मेले एवं कृषि उद्योग प्रदर्शनीं का फीता काटकर व दीप प्रज्ज्वलित कर शुभारम्भ किया।

राज्यपाल ने कहा कि आज 120वें अखिल भारतीय किसान मेले एवं कृषि औद्योगिक प्रदर्शनी के अवसर पर पंतनगर की इस कर्मभूमि पर उपस्थित होकर मुझे अत्यंत प्रसन्नता हो रही है। यह किसान,विज्ञान,युवा, उद्यमिता और नई तकनीक को एक मंच पर जोड़ने का महत्वपूर्ण अवसर है। उन्होंने कहा जिस मिट्टी से अन्न निकलता है, उसी मिट्टी से भारत की आत्मनिर्भरता की शक्ति भी निकलती है। इसलिए किसान केवल खेत का स्वामी नहीं, राष्ट्र के भविष्य का निर्माता है। 120वें किसान मेले तक पहुँची यह गौरवशाली परंपरा कृषि के प्रति हमारे निरंतर विश्वास और किसान के साथ संवाद की जीवंत पहचान है। उन्होंने कहा पंतनगर का नाम लेते ही कृषि शिक्षा, अनुसंधान, नवाचार और किसान सेवा की एक सशक्त परंपरा हमारे सामने आती है। यह विश्वविद्यालय खेत और किसान से जुड़ा महत्वपूर्ण ज्ञान-केंद्र है। आज आवश्यकता है कि इस ज्ञान को और व्यापक बनाकर उत्तराखण्ड के प्रत्येक कृषि क्षेत्र और प्रत्येक किसान तक पहुँचाया जाए।

राज्यपाल ने कहा कि हमारी सनातन भारतीय संस्कृति में अन्न को केवल भोजन नहीं,जीवन का आधार माना गया है। श्रीमद्भगवद्गीता में भगवान श्रीकृष्ण कहते हैं-“अन्नाद्भवन्ति भूतानि पर्जन्यादन्नसम्भवः।यज्ञाद्भवति पर्जन्यो यज्ञः कर्म समुद्भवः॥”अर्थात् समस्त प्राणियों का आधार अन्न है, अन्न वर्षा से उत्पन्न होता है और वर्षा प्रकृति तथा कर्म के संतुलन से जुड़ी है। यह श्लोक हमें याद दिलाता है कि किसान केवल फसल पैदा नहीं करता, वह जीवन की पूरी श्रृंखला को आगे बढ़ाता है। इसलिए किसान का सम्मान जीवन, प्रकृति और राष्ट्र के सम्मान से जुड़ा है।आज का किसान बदलती परिस्थितियों के बीच खेती कर रहा है। जलवायु परिवर्तन, अनियमित वर्षा, जल संकट, उत्पादन लागत, श्रम की कमी, बाजार की अनिश्चितता उसके सामने हैं।प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी जी के नेतृत्व में केंद्र सरकार ने किसानों की आय, कृषि सुरक्षा और आधुनिक तकनीक को मजबूत करने के लिए अनेक पहल की हैं। प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि, किसान क्रेडिट कार्ड और प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना जैसी योजनाओं के माध्यम से किसानों को आर्थिक सहायता, संस्थागत ऋण और फसल जोखिम से सुरक्षा देने का प्रयास किया जा रहा है।

राज्यपाल ने कहा कि डिजिटल कृषि मिशन के माध्यम से किसान रजिस्ट्री,मौसम एवं उपग्रह आधारित जानकारी तथा एआई और बिग डेटा जैसी तकनीकों को कृषि से जोड़ा जा रहा है। प्रधानमंत्री धन-धान्य कृषि योजना तथा उच्च उपज और जलवायु अनुकूल बीजों से जुड़े प्रयासों के माध्यम से उत्पादकता,फसल विविधीकरण और कृषि को अधिक सक्षम बनाने पर जोर दिया जा रहा है। यह बदलती कृषि का संकेत है, जहाँ परंपरागत अनुभव के साथ विज्ञान, डेटा और तकनीक किसान की नई शक्ति बन रहे हैं।आज कृषि में नई तकनीक की भूमिका तेजी से बढ़ रही है। कृत्रिम बुद्धिमत्ता यानी एआई मौसम के पूर्वानुमान, फसल में रोग की शुरुआती पहचान, मिट्टी की स्थिति के विश्लेषण,सिंचाई की जरूरत तय करने और उत्पादन का अनुमान लगाने में उपयोगी हो सकती है। ड्रोन खेतों की निगरानी और छिड़काव में सहायक हो रहे हैं, जबकि सेंसर और डिजिटल उपकरण पानी, मिट्टी और फसल की स्थिति की जानकारी देते हैं। तकनीक का उद्देश्य केवल उत्पादन बढ़ाना नहीं, बल्कि कृषि की लागत कम करना, संसाधनों का बेहतर उपयोग करना और किसान के निर्णय को अधिक सटीक बनाना भी होना चाहिए।लेकिन तकनीक तभी सार्थक है, जब वह किसान तक पहुँचे।

राज्यपाल ने कहा कि आज एआई और डिजिटल कृषि केवल बड़े किसानों तक सीमित नहीं है। छोटे और सीमांत किसान को भी इन तकनीकों का लाभ मिल रहा है जो उसकी लागत घटा रहे है। निर्णय आसान बना रहे है। और उसकी आय के अवसर बढ़ा रहे है। उत्तराखण्ड की कृषि की अपनी विशिष्ट पहचान है। हमारे पास मैदान,भाबर, तराई और निम्न, मध्य तथा उच्च हिमालयी क्षेत्र हैं। यह विविधता चुनौती भी है और अवसर भी। हमें एक ही कृषि मॉडल सब जगह लागू करने के बजाय स्थानीय परिस्थितियों के अनुरूप कृषि मॉडल विकसित करने होंगे। पर्वतीय क्षेत्रों में जहाँ भूमि सीमित है, वहाँ हमारा लक्ष्य होना चाहिए- कम भूमि से अधिक मूल्य फल, सब्जियाँ,पुष्प,सुगंधित और औषधीय पौधे, मशरूम उत्पादन, मधुमक्खी पालन तथा अन्य उच्च मूल्य कृषि गतिविधियाँ किसानों के लिए आय के नए रास्ते खोल सकती हैं। उन्होंने कहा केवल उत्पादन पर्याप्त नहीं है, हमें बीज से उत्पादन, उत्पादन से प्रसंस्करण,प्रसंस्करण से पैकेजिंग और पैकेजिंग से बाजार तक पूरी श्रृंखला को मजबूत करना होगा।

राज्यपाल ने कहा कि मुझे प्रसन्नता है कि आज हमारे किसान केवल उत्पादक नहीं,कृषि उद्यमी बन रहे हैं। हमारे खेत केवल फसल के केंद्र नहीं, वे मूल्य संवर्धन, रोजगार और उद्यमिता के केंद्र भी बन रहे हैं। किसान उत्पादक संगठन, सहकारी संस्थाएँ,स्वयं सहायता समूह, स्थानीय प्रसंस्करण इकाइयाँ और कृषि आधारित छोटे उद्यम गाँव की अर्थव्यवस्था को नई शक्ति दे रहे हैं। हमारे स्थानीय उत्पाद आज उत्तराखण्ड से बाहर निकलकर विदेशों तक अपनी पहचान बना रहे हैं। मुझे कृषि विरासत और नई कृषि तकनीक के साथ दिखाई देने वाला यह मेला विशेष रूप से महत्वपूर्ण लगता है। हमारी पारंपरिक फसलें, स्थानीय बीज और पीढ़ियों से संचित कृषि ज्ञान हमारी अमूल्य धरोहर हैं। परंपरा के उपयोगी ज्ञान को आधुनिक विज्ञान से जोड़ना है। परंपरा हमारी जड़ है और विज्ञान हमारी गति दोनों का समन्वय हमारी कृषि को अधिक टिकाऊ और सक्षम बना सकता है। जल संरक्षण को भी कृषि के केंद्र में रखना होगा। वर्षा जल का संचयन, कम पानी वाली फसलें, सूक्ष्म सिंचाई, मिट्टी की नमी का संरक्षण और प्राकृतिक संसाधनों का विवेकपूर्ण उपयोग आने वाले समय की आवश्यकता है। प्रकृति से संघर्ष करके नहीं, प्रकृति के साथ संतुलन बनाकर चलने वाली कृषि ही दीर्घकाल तक किसान और समाज दोनों को समृद्ध कर सकती है। उन्होंने कहा कि मैं उत्तराखण्ड की कृषक महिलाओं को विशेष रूप से नमन करता हूँ। पहाड़ की कृषि में उन्होंने कठिन परिस्थितियों में परिवार और खेत दोनों को संभाला है। इतना ही नहीं अब उनकी भूमिका कृषि श्रम से आगे बढ़कर कृषि उद्यमिता,उत्पादक समूहों के नेतृत्व और स्थानीय उत्पादों के मूल्य संवर्धन तक अपनी पहुंच बना रही है।

राज्यपाल ने कहा कि हमारे युवाओं के लिए कृषि में अपार संभावनाएँ हैं। एग्री-टेक से लेकर ड्रोन सेवा, कृषि प्रसंस्करण से लेकर डिजिटल बाजार और कृषि आधारित स्टार्ट-अप तक युवाओं के लिए अनेक नए अवसर खुल रहे हैं। यदि किसान का अनुभव और युवा की तकनीकी क्षमता साथ आए, तो कृषि नवाचार और रोजगार का नया आधार बन सकती है। कृषि को पलायन की चुनौती से जोड़कर अब एक सकारात्मक बदलाव दिखाई दे रहा है। सरकार की विभिन्न योजनाओं और प्रयासों से जुड़कर कई युवा अपने गाँवों की ओर लौट रहे हैं और कृषि, बागवानी से जुड़े उद्यमों को अपना रहे हैं। उन्हें स्थानीय स्तर पर प्रशिक्षण, तकनीकी सहयोग, बाजार और रोजगार के नए अवसर मिल रहे हैं। उन्होने कहा मैं अपेक्षा करता हूँ कि विश्वविद्यालय का शोध खेत की वास्तविक समस्याओं से और अधिक जुड़े, कृषि विज्ञान केंद्र स्थानीय समाधान के केंद्र बनें और वैज्ञानिक ज्ञान उत्तराखण्ड के सभी जिलों तक पहुँचे। शोध का अंतिम लक्ष्य केवल शोधपत्र नहीं, बल्कि किसान के खेत में दिखाई देने वाला परिवर्तन होना चाहिए। विश्वविद्यालय, सरकार, वैज्ञानिक, किसान, युवा और कृषि उद्यमी मिलकर काम करेंगे, तभी ज्ञान वास्तव में जन-शक्ति बनेगा।

राज्यपाल ने कहा कि किसान भाइयों और बहनों आज इस अवसर पर हमें एक स्पष्ट संकल्प लेना है-कृषि को अधिक लाभकारी,अधिक टिकाऊ,अधिक तकनीक-सक्षम और अधिक सम्मानजनक बनाना है। खेत में विज्ञान पहुँचे,किसान के हाथ में तकनीक पहुँचे,एआई का लाभ गाँव तक पहुँचे,पानी की हर बूंद का सदुपयोग हो, स्थानीय उत्पाद को पहचान और बाजार मिले तथा युवा कृषि में अपना भविष्य देखें मेरा विश्वास है कि उत्तराखण्ड के विकास की राह खेतों से होकर गुजरती है। उन्होंने कहा समृद्ध किसान होगा तो समृद्ध गाँव होगा।समृद्ध गाँव होगा तो सशक्त उत्तराखण्ड बनेगा। और सशक्त उत्तराखण्ड, विकसित भारत की शक्ति बनेगा। आइए! हम ऐसा उत्तराखण्ड बनाने का संकल्प लें जहाँ खेत में नवाचार हो, किसान के हाथ में तकनीक हो, स्थानीय उत्पाद को बाजार मिले, गाँव में रोजगार हो और युवा को अपने गाँव में अपना भविष्य दिखाई दे।किसान की समृद्धि केवल कृषि की सफलता नहीं, बल्कि गाँव की समृद्धि, उत्तराखण्ड की शक्ति और भारत की आत्मनिर्भरता की आधारशिला है। इसी संकल्प और विश्वास के साथ 120वें अखिल भारतीय किसान मेले के आयोजन के लिए पंतनगर विश्वविद्यालय परिवार को हार्दिक बधाई देता हूँ। देश और प्रदेश के विभिन्न क्षेत्रों से आए सभी किसान भाई-बहनों का अभिनंदन करता हूँ तथा वैज्ञानिकों, शिक्षकों, विद्यार्थियों, कृषि उद्यमियों और कृषि क्षेत्र से जुड़े सभी साथियों को शुभकामनाएं देता हूँ।

काबीना मंत्री कृषि एवं कृषक कल्याण गणेश जोशी ने 120 वे अखिल भारतीय किसान मेला आयोजन हेतु सभी को बधाई व शुभकामनाएं दी। उन्होंने कहा पंत नगर विश्वविद्यालय के बीज एक ब्रॉड हैं तथा सभी किसानों को उन्नत बीज उपलब्ध कराने का प्रयास किया जा रहा है। उन्होंने कहा डबल इंजन सरकार लगातार कृषकों के हितों के लिए कार्य कर रही है तथा सभी किसानों को किसान सम्मान निधि दी जा रही है। सरकार लगातार कृषकों की आय वृद्धि हेतु कार्य कर रही है।

कुलपति जी बी पंत विश्वविद्यालय डॉ एस के कश्यप ने विश्वविद्यालय गौरवशाली इतिहास पर विस्तृत प्रकाश डाला व कहा विश्वविद्यालय हमेशा किसानों के साथ है तथा हमेशा कृषकों को उन्नत बीज व उन्नत तकनीक उपलब्ध कराने के लिए तत्पर है।

कार्यक्रम में अतिथियों द्वारा 10 प्रगतिशील कृषकों को सम्मानित किया गया व साहित्य का विमोचन किया गया। इस अवसर पर कुलपति मुक्त विश्विद्यालय प्राे नवीन चंद्र लोहानी, कुमाऊँ विश्विद्यालय प्राे एस एस बिष्ट,निदेशक प्रसार जितेन्द्र क्वात्रा,निदेशक शोध एस के वर्मा, जिलाधिकारी नितिन सिंह भदौरिया, वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक अजय गणपति,डेम बी एस चलाल सहित विश्वविद्यालय के डीन,डायरेक्टर, वैज्ञानिक, कृषक आदि मौजूद थे।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *