प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी जी के सार्वजनिक जीवन के 25 वर्ष पूर्ण होने पर परमार्थ निकेतन में विशेष यज्ञ का आयोजन*

*आज की परमार्थ गंगा आरती राष्ट्र को समर्पित*

*राष्ट्रसेवा, संकल्प, साधना और समर्पण की 25 वर्षों की अखंड यात्रा को नमन*

ऋषिकेश, 7 अक्टूबर 2026। भारत के माननीय प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी जी के सार्वजनिक जीवन के 25 वर्ष पूर्ण होने के अवसर पर आज परमार्थ निकेतन, ऋषिकेश में प्रातःकालीन यज्ञ एवं सायंकालीन माँ गंगाजी की दिव्य आरती को उनके राष्ट्रसेवा के 25 वर्षों को समर्पित किया। इस पावन अवसर पर परमार्थ पीठाधीश्वर, पूज्य स्वामी चिदानन्द सरस्वती जी के पावन सान्निध्य में ऋषिकुमारों ने माँ गंगा के तट से भारत की समृद्धि, शांति, प्रगति, सांस्कृतिक चेतना और विश्वकल्याण की मंगलकामना की तथा प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी जी के उत्तम स्वास्थ्य, दीर्घायु, अटूट ऊर्जा और राष्ट्रसेवा की निरंतर शक्ति के लिए प्रार्थना की गई।

पूज्य स्वामी चिदानन्द सरस्वती जी ने कहा कि प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी जी के सार्वजनिक जीवन के 25 वर्ष केवल समय का एक कालखंड नहीं हैं, बल्कि राष्ट्रसेवा, संकल्प, साधना और समर्पण की ऐसी अखंड यात्रा हैं, जिसे इतिहास स्वर्ण अक्षरों में लिखेगा। यह राष्ट्रनिर्माण की यात्रा है, भारत के पुनर्जागरण की यात्रा है और भारत के आत्मविश्वास के जागरण की यात्रा है।

उन्होंने कहा कि देश-विदेश में अनेक राष्ट्राध्यक्ष और प्रधानमंत्री हुए, जिन्होंने अपना कार्यकाल पूरा किया और इतिहास के पन्नों में दर्ज हो गए; परंतु कुछ व्यक्तित्व ऐसे होते हैं, जो केवल इतिहास का हिस्सा नहीं बनते, वे इतिहास रचते हैं। श्री नरेंद्र मोदी जी ऐसे ही व्यक्तित्व हैं। उनकी 25 वर्षों की सार्वजनिक जीवन यात्रा एक ऐसी परिवर्तनकारी गाथा है, जो आने वाली पीढ़ियों को आने वाली पीढ़ियों तक प्रेरणा देती रहेगी।

गुजरात से आरंभ हुई उनकी यह यात्रा आज विकसित भारत के संकल्प से लेकर वैश्विक शांति और विश्वकल्याण के संकल्प तक पहुंच चुकी है। इन वर्षों में सेवा, सुशासन, संकल्प और राष्ट्र प्रथम की भावना ने करोड़ों भारतीयों के हृदय में एक नया आत्मविश्वास जगाया है। उन्होंने भारत के मन में यह विश्वास जगाया कि हम कर सकते हैं, हम बदल सकते हैं और हम विश्व का नेतृत्व कर सकते हैं।

परम पूज्य स्वामी जी ने कहा कि माननीय श्री नरेन्द्र मोदी जी समर्थवान हैं, समझदार हैं, सहनशील भी हैं और सृजनशील भी हैं। भारत जैसे विशाल और विविधताओं से भरे देश के प्रधानमंत्री को कोई भी निर्णय लेने से पहले अनेकों बार सोचना होता है। इतना आसान नहीं है भारत का प्रधानमंत्री होना परन्तु मोदी जी की सबसे बड़ी उपलब्धि यह है कि उन्होंने देशवासियों के भीतर भारत की सामर्थ्य पर विश्वास जगाया।

आज पूरा विश्व भारत को भारत की दृष्टि से, भारत की ऐनक से, भारत के एंगल से, भारत के चश्मे से और भारत की अपनी चेतना से देख रहा है। इन 25 वर्षों में विकास से विरासत तक, सुई से लेकर सी-प्लेन तक, चिप से लेकर शिप तक, सूर्य नमस्कार से लेकर चंद्र मिशन के चमत्कार तक, साइंस से लेकर स्पिरिचुअलिटी तक, अयोध्या के श्रीराम मंदिर से लेकर काशी विश्वनाथ तक, केदारनाथ के कॉरिडोर से लेकर महाकाल तक, भारत ने विकास और विरासत के एक अद्भुत समन्वय को देखा है।

विपरीत परिस्थितियों, व्यापक चुनौतियों और बड़े जोखिमों के बीच लिए गए अनेक ऐतिहासिक निर्णयों ने भारत की दिशा और दशा को प्रभावित किया। कच्छ का पुनर्निर्माण, ज्योतिग्राम, नोटबंदी, सर्जिकल स्ट्राइक, बालाकोट एयर स्ट्राइक, अनुच्छेद 370 में ऐतिहासिक परिवर्तन, तीन तलाक के विरुद्ध कानून, सीएए, नई शिक्षा नीति, आत्मनिर्भर भारत, नारी शक्ति वंदन अधिनियम, राम मंदिर निर्माण, डिजिटल इंडिया, यूपीआई, जी20 और वैश्विक मंच पर ग्लोबल साउथ की आवाज़ को सशक्त करना, ये केवल निर्णय नहीं, बल्कि बदलते भारत की यात्रा के महत्वपूर्ण अध्याय हैं।

उन्होंने कहा कि अथक परिश्रम, अद्भुत संकल्पशक्ति और राष्ट्र को सर्वाेपरि रखने का भाव उनकी कार्यशैली की विशिष्ट पहचान है। हर कदम राष्ट्र के लिए, हर संकल्प भारत के लिए और हर उपलब्धि विश्वकल्याण के लिए है।

परम पूज्य स्वामी जी ने कहा कि विश्व में हो रहे इतने युद्धों और संघर्षों के बीच भारत में महाभारत नहीं, बल्कि भारत को महान भारत बनाने की विकास यात्रा आगे बढ़ी है। भारत की सभ्यता और सांस्कृतिक इतिहास को आगे बढ़ाने तथा भारत की चेतना को विश्व पटल पर प्रतिष्ठित करने के लिए किए गए कार्यों के लिए पूरा भारत उनका ऋणी रहेगा।

आज परमार्थ निकेतन से माँ गंगा के पावन तट पर यही मंगलकामना है कि भारत का वैभव बढ़े, भारत का आत्मविश्वास बढ़े, भारत की संस्कृति से पूरा विश्व प्रकाशित हो और 2047 का विकसित भारत विश्वकल्याण का एक दिव्य संकल्प बने।

माँ गंगा माननीय प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी जी को दीर्घायु, उत्तम स्वास्थ्य, अटूट ऊर्जा और राष्ट्रसेवा की निरंतर शक्ति प्रदान करें। उनके द्वारा आरंभ किए गए भारत के उज्ज्वल भविष्य के इस महायज्ञ में हम सभी सहभागी बनें और विकसित, आत्मनिर्भर, संस्कारित एवं विश्वकल्याणकारी भारत के संकल्प को मिलकर साकार करें।

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