शिव-साधना के साथ सेवा का महायज्ञ – बाघखाला चिकित्सा शिविर में उमड़ा शिवभक्तों का सैलाब
शिव की साधना के साथ, शिवत्व को जीना
पीड़ित मानवता की सेवा ही शिव-आराधना
स्वामी चिदानन्द सरस्वती
ऋषिकेश, 11 अगस्त। पावन श्रावण मास की शिवरात्रि के अवसर पर परमार्थ निकेतन में आज आध्यात्मिकता, भक्ति और सेवा का अद्भुत संगम हुआ। एक ओर आश्रम परिसर रुद्राभिषेक और पूजन ऋषिकुमारों द्वारा किया जा रहा है वहीं दूसरी ओर परमार्थ निकेतन द्वारा बाघखाला में आयोजित चिकित्सा शिविर में शिवभक्तों और श्रद्धालुओं की अपार भीड़ उमड़ी। बड़ी संख्या में शिवभक्त चिकित्सा सुविधाओं का लाभ ले रहे हैं।
श्रावण शिवरात्रि के पावन अवसर पर परमार्थ निकेतन के परमाध्यक्ष, परमार्थ पीठाधीश्वर, पूज्य स्वामी चिदानन्द सरस्वती जी ने शिवभक्तों को अनंत मंगलमय शुभकामनाएँ देते हुए कहा कि शिवरात्रि, चेतना के जागरण, अंतर्मन के शुद्धिकरण और जीवन को लोककल्याण के लिए समर्पित करने का महापर्व है।
उन्होंने कहा, “शिव का अर्थ ही कल्याण है। जब हम किसी के जीवन से पीड़ा कम करते हैं, किसी के चेहरे पर मुस्कान लाते हैं, किसी जरूरतमंद को स्वास्थ्य, सहयोग और सम्मान देते हैं, तब हम वास्तव में शिव की आराधना कर रहे होते हैं। शिव को केवल पूजना नहीं है बल्कि शिवत्व को अपने जीवन में आत्मसात करना है।”
पूज्य स्वामी जी ने कहा कि भगवान शिव का जीवन हमें त्याग, तपस्या, समता, करुणा और लोकमंगल का संदेश देता है। उन्होंने विष को अपने कंठ में धारण कर संसार को अमृतमय जीवन दिया। यही शिवत्व का सार है, स्वयं कष्ट सहकर भी दूसरों के जीवन को सुख, शांति और सुरक्षा प्रदान करना।
श्रावण शिवरात्रि के अवसर पर बाघखाला में आयोजित चिकित्सा शिविर में बड़ी संख्या में शिवभक्तों और श्रद्धालुओं ने स्वास्थ्य सेवाओं का लाभ उठाया। शिवभक्ति के लिए विभिन्न क्षेत्रों से आने वाले श्रद्धालुओं के लिए यह चिकित्सा सेवा विशेष रूप से महत्वपूर्ण रही। सेवा-भाव से कार्यरत चिकित्सकों और स्वास्थ्यकर्मियों द्वारा श्रद्धालुओं को आवश्यक स्वास्थ्य सुविधाएँ उपलब्ध कराई जा रही है।
पूज्य स्वामी जी ने कहा कि शिवरात्रि हमें अपने भीतर के अंधकार को पहचानने और उसे ज्ञान, करुणा तथा प्रेम के प्रकाश से दूर करने का अवसर देती है। यह वह रात्रि है जो हमें अहंकार से समर्पण, स्वार्थ से परमार्थ और पूजा से सेवा की ओर ले जाती है।

उन्होंने सभी शिवभक्तों से आह्वान किया कि शिवाभिषेक के साथ धराभिषेक करें। इस शिवरात्रि एक दीप अपने भीतर जलाएँ, क्रोध के स्थान पर करुणा का, द्वेष के स्थान पर प्रेम का, अहंकार के स्थान पर समर्पण का और स्वार्थ के स्थान पर सेवा का दीप जलायें। शिव की साधना हो, सेवा का संकल्प हो और जीवन में शिवत्व का प्रकाश हो, इन्हीं मंगलकामनाओं के साथ परमार्थ निकेतन से श्रावण शिवरात्रि की अनंत शुभकामनाएँ।
