अगरबत्ती निर्माण का हुनर सीख आत्मनिर्भर बनेंगी 35 महिलाएं

दरमोला गांव में एसबीआई आरसेटी का 12 दिवसीय प्रशिक्षण कार्यक्रम जारी

ग्रामीण क्षेत्र की महिलाओं को स्वरोजगार से जोड़ने और उन्हें आत्मनिर्भर बनाने के उद्देश्य से भारतीय स्टेट बैंक ग्रामीण स्वरोजगार प्रशिक्षण संस्थान (आरसेटी), रुद्रप्रयाग द्वारा जखोली विकासखंड के दरमोला गांव में 12 दिवसीय धूप एवं अगरबत्ती निर्माण प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित किया जा रहा है। 5 सितंबर से शुरू हुआ यह प्रशिक्षण कार्यक्रम 16 सितंबर तक चलेगा, जिसमें 35 महिलाएं उत्साहपूर्वक प्रतिभाग कर रही हैं।

प्रशिक्षण कार्यक्रम के दौरान लीड बैंक अधिकारी अनूप सिंह ने प्रतिभागियों को बैंकिंग सेवाओं, वित्तीय साक्षरता, ऋण सुविधाओं तथा स्वरोजगार के लिए उपलब्ध विभिन्न वित्तीय विकल्पों की जानकारी दी। वहीं आरसेटी निदेशक अरुण कुमार ने संस्थान की कार्यप्रणाली तथा आरसेटी द्वारा संचालित विभिन्न रोजगारपरक प्रशिक्षण कार्यक्रमों और गतिविधियों के बारे में विस्तार से जानकारी दी।

चंपावत जिले से पहुंची मास्टर ट्रेनर भावना जोशी द्वारा प्रशिक्षणार्थियों को विभिन्न प्रकार की धूप, अगरबत्ती एवं अन्य संबंधित उत्पाद तैयार करने की तकनीकी जानकारी के साथ ही व्यावहारिक प्रशिक्षण दिया जा रहा है। प्रशिक्षण में उत्पाद निर्माण के साथ-साथ गुणवत्तापूर्ण कच्चे माल का चयन, उत्पाद की पैकेजिंग, बाजार की मांग तथा इसे स्वरोजगार के रूप में अपनाने की संभावनाओं के बारे में भी जानकारी दी जा रही है।
आरसेटी के प्रशिक्षक भूपेंद्र सिंह रावत द्वारा प्रशिक्षणार्थियों को व्यवसाय शुरू करने की प्रक्रिया, उद्यमिता, व्यवसाय प्रबंधन एवं एंटरप्राइज से संबंधित जानकारी प्रदान की जा रही है। साथ ही स्वरोजगार के विभिन्न अवसरों की जानकारी देने के साथ ही महिलाओं के व्यक्तित्व विकास और आत्मविश्वास को बढ़ाने के लिए विभिन्न खेल एवं गतिविधियां भी आयोजित की जा रही हैं।
दरमोला गांव में आयोजित इस प्रशिक्षण को लेकर महिलाओं में खासा उत्साह देखने को मिल रहा है।

प्रशिक्षणार्थियों का कहना है कि धूप एवं अगरबत्ती निर्माण का हुनर सीखकर वे भविष्य में अपने स्तर पर छोटा व्यवसाय शुरू कर आय का साधन विकसित करने के साथ आत्मनिर्भर बनने की दिशा में आगे बढ़ सकेंगी।

आरसेटी का उद्देश्य ग्रामीण क्षेत्रों के लोगों, विशेषकर महिलाओं और युवाओं को रोजगारपरक एवं व्यावहारिक प्रशिक्षण प्रदान कर उन्हें स्वरोजगार के लिए सक्षम बनाना है। इस तरह के प्रशिक्षण कार्यक्रम ग्रामीण क्षेत्रों में स्थानीय स्तर पर रोजगार के अवसर विकसित करने और महिलाओं को आर्थिक रूप से सशक्त बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे हैं।

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