*यूएसडीएमए की कार्यप्रणाली से रूबरू हुए प्रशिक्षु डिप्टी एसपी*

*आपदा प्रबंधन में पुलिस की भूमिका पर प्रदान की गई जानकारी*

देहरादून। उत्तराखण्ड राज्य आपदा प्रबंधन प्राधिकरण (यूएसडीएमए) में वर्ष 2024 बैच के प्रशिक्षु डिप्टी पुलिस अधीक्षक राज्य की आपदा प्रबंधन प्रणाली, संस्थागत ढांचे तथा आपदा प्रबंधन के विभिन्न चरणों में पुलिस के अधिकारियों तथा विभाग की भूमिका से रूबरू हुए।

इस दौरान प्रशिक्षु अधिकारियों को आपदा प्रबंधन विभाग की कार्यप्रणाली, आईआरएस (इंसिडेंट रिस्पॉन्स सिस्टम) की अवधारणा एवं संरचना, चेतावनी प्रसारण तंत्र, आपदा पूर्व तैयारी, आपदा के दौरान त्वरित प्रतिक्रिया तथा आपदा उपरांत पुनर्वास एवं पुनर्निर्माण की प्रक्रियाओं के बारे में विस्तार से जानकारी दी गई। साथ ही राष्ट्रीय आपदा प्रबंधन प्राधिकरण एवं उत्तराखंड राज्य आपदा प्रबंधन प्राधिकरण की भूमिका, नीतिगत दिशा-निर्देशों तथा राज्य स्तर पर उनके क्रियान्वयन की प्रक्रिया पर भी प्रकाश डाला गया। अधिकारी एसईओसी और डीईओसी की कार्य प्रणाली से भी रूबरू हुए।

कार्यक्रम को संबोधित करते हुए सचिव आपदा प्रबंधन एवं पुनर्वास श्री विनोद कुमार सुमन ने कहा कि आपदा प्रबंधन के संपूर्ण चक्र-आपदा पूर्व, आपदा के दौरान एवं आपदा के बाद की प्रक्रिया में पुलिस विभाग की भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण एवं संवेदनशील होती है। उन्होंने कहा कि किसी भी आपदा की स्थिति में पुलिस बल सबसे पहले मौके पर पहुंचने वाले प्रमुख एजेंसियों में से एक होता है, जिसकी जिम्मेदारी केवल कानून-व्यवस्था बनाए रखने तक सीमित नहीं रहती, बल्कि मानव जीवन की सुरक्षा, त्वरित राहत एवं बचाव कार्यों में सक्रिय सहयोग देना भी होती है।

उन्होंने बताया कि आपदा के समय पुलिस की प्रमुख भूमिका में प्रभावित क्षेत्रों में त्वरित पहुंच सुनिश्चित करना, सुरक्षित निकासी (एवैक्यूएशन), भीड़ एवं यातायात प्रबंधन, राहत सामग्री के निर्बाध वितरण में सहयोग, संवेदनशील स्थलों की सुरक्षा, अफवाहों पर नियंत्रण तथा सटीक सूचना का संप्रेषण शामिल है। इसके अतिरिक्त प्रशासन, आपदा प्रबंधन विभाग, स्वास्थ्य, अग्निशमन, एसडीआरएफ एवं अन्य एजेंसियों के साथ समन्वय स्थापित कर संयुक्त रूप से प्रभावी कार्रवाई सुनिश्चित करना भी पुलिस की महत्वपूर्ण जिम्मेदारी होती है।

उन्होंने कहा कि प्रशिक्षु अधिकारियों को भविष्य में एक जिम्मेदार पुलिस अधिकारी के रूप में आपदा प्रबंधन से जुड़ी रणनीतिक एवं नेतृत्वकारी भूमिकाओं का निर्वहन करना होगा। उन्होंने कहा कि ऐसे समय में डेडिकेशन, डिवोशन, मानवीय संवेदनशीलता, अनुशासन और त्वरित निर्णय क्षमता ही प्रभावी आपदा प्रबंधन की कुंजी होती है। उन्होंने आशा व्यक्त की कि इस प्रकार के अभिमुखीकरण कार्यक्रम प्रशिक्षु डिप्टी एसपी को आपदा प्रबंधन की जमीनी समझ प्रदान करेंगे तथा वे भविष्य में राज्य की आपदा प्रबंधन व्यवस्था को और अधिक सुदृढ़, प्रभावी एवं जनोन्मुखी बनाने में महत्वपूर्ण योगदान देंगे।

इस अवसर पर अपर मुख्य कार्यकारी अधिकारी क्रियान्वयन डीआईजी श्री राजकुमार नेगी, संयुक्त मुख्य कार्यकारी अधिकारी मो0 ओबैदुल्लाह अंसारी, डाॅ. पीडी माथुर, श्री मनीष भगत, डाॅ. पूजा राणा के साथ ही प्रशिक्षु डिप्टी एसपी श्री दक्ष शोखंद, श्री आदित्य तिवारी, श्री लव शर्मा, श्री दिव्येश उपाध्याय, श्री अंकित थपलियाल, श्री समीरण भट्ट, श्री विनय सिंह, सुश्री अवनी तिवारी, सुश्री दीप्ति कैड़ा एवं सुश्री तनुजा बिष्ट उपस्थित रहे।

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