आठवां ज्योतिष महाकुम्भ*
आठवां ज्योतिष महाकुम्भ, उद्घाटन सत्र में परमार्थ निकेतन के अध्यक्ष पूज्य स्वामी चिदानन्द सरस्वती जी का पावन सान्निध्य*
उत्तराखंड़ के मुख्यमंत्री माननीय श्री पुष्कर सिंह धामी जी की गरिमामयी उपस्थिति*
ग्राफिक एरा सिल्वर जुबली कव्वेंशन सेंटर ग्राफिक एरा डीम्ड विश्वविद्यालय में आयोजित*
श्री अनूप वाजपेयी जी, सम्पादक अमर उजाला, श्री प्रवीण शर्मा, यूनिट हेड़ अमर उजाला, प्रो कमल घनशाला जी, अध्यक्ष, ग्राफिक एरा ग्रुप, श्री विनीत मिश्रा जी, मार्केटिंग हेड, अमर उजाला और अन्य विशिष्ट अतिथियों की गरिमामयी उपस्थिति*
श्री चक्र सम्मान, प्रायोजक व सहयोगी संस्थाओं का सम्मान, ज्योतिष तपस्वी सम्मान, लाइफटाइम अचीवमेंट अवार्ड से आचार्यों को किया सम्मानित*
*आठवाँ ज्योतिष महाकुंभ, सनातन ज्ञान, विज्ञान और राष्ट्रचेतना का दिव्य संगम*
राष्ट्रिय बालिका दिवस और विश्व शिक्षा दिवस की शुभकामनायें*
9 से 15 मार्च, अन्तर्राष्ट्रीय योग महोत्सव, परमार्थ निकेतन के अवसर पर ज्योतिष महाकुम्भ आयोजित करने पर पूज्य स्वामी जी व माननीय मुख्यमंत्री श्री पुष्कर सिंह धामी जी के बीच हुई चर्चा*
देहरादून। ग्राफिक एरा सिल्वर जुबली कन्वेंशन सेंटर, ग्राफिक एरा डीम्ड विश्वविद्यालय में आयोजित आठवाँ ज्योतिष महाकुंभ सनातन परंपरा, शास्त्रोक्त ज्ञान और आधुनिक दृष्टि का एक भव्य, प्रेरणादायक एवं ऐतिहासिक समारोह है। इस दिव्य आयोजन के उद्घाटन सत्र में परमार्थ निकेतन, ऋषिकेश के अध्यक्ष पूज्य स्वामी चिदानन्द सरस्वती जी का पावन सान्निध्य और उत्तराखंड के मुख्यमंत्री माननीय श्री पुष्कर सिंह धामी जी की गरिमामयी उपस्थिति समस्त ज्योतिष जगत के लिए अत्यंत गौरवपूर्ण क्षण है।
मुख्यमंत्री श्री पुष्कर सिंह धामी जी ने ज्योतिष को भारत की प्राचीन वैज्ञानिक परंपरा बताते हुए कहा कि ज्योतिष केवल भविष्य कथन नहीं, बल्कि समय, प्रकृति और मानव जीवन के गहन अध्ययन का विज्ञान है, जो आज भी समाज को दिशा देने की क्षमता रखता है।
पूज्य स्वामी चिदानन्द सरस्वती जी ने अपने आशीर्वचन में कहा कि “ज्योतिष सनातन धर्म की वह दिव्य धारा है, जो मनुष्य को भय नहीं, बल्कि भाव जगाती है, विवेक देती है। ज्योतिष, कर्म और काल के बीच संतुलन सिखाता है। ज्योतिष आत्मबोध का माध्यम है, न कि भाग्य का बंधन।” उन्होंने इस बात पर बल दिया कि आज के युग में ज्योतिष को शुद्ध, शास्त्रोक्त और सेवा-भाव से प्रस्तुत करना अत्यंत आवश्यक है, ताकि यह समाज के कल्याण का साधन बन सके।
स्वामी जी ने कहा कि वेदस्य नेत्रं ज्योतिषम् जिस प्रकार नेत्र बिना प्रकाश के दिशाहीन हो जाते हैं, उसी प्रकार जीवन और कर्म का मार्गदर्शन ज्योतिष के बिना अपूर्ण है। सनातन ज्योतिष भाग्यवाद नहीं, बल्कि कर्मवाद का समर्थक है। ज्योतिष सनातन की एक विधा है, ज्योतिष एक विद्या है, ज्योतिष अंधविश्वास नहीं बल्कि आत्मविश्वास जगाता है, ज्योतिष, विज्ञान का विरोधी नहीं, ये तो ज्ञान का सहयोगी है। ज्योतिष का उद्देेश्य भय नहीं बल्कि भाव सृष्टि के साथ जोड़ना है। यह भय के अन्धकार में मिटाकर भाव के प्रकाश को जाग्रत करता है। असतो मा सद्गमय, तमसो मा ज्योतिर्गमय, की यात्रा है ज्योतिष।
स्वामी जी ने कहा कि 24 जनवरी 1950 भारत के लोकतांत्रिक इतिहास का एक अत्यंत महत्वपूर्ण दिन है। इसी दिन संविधान सभा की अंतिम बैठक में डॉ. राजेंद्र प्रसाद जी को स्वतंत्र भारत के प्रथम राष्ट्रपति के रूप में सर्वसम्मति से चुना गया। यह निर्णय देश की लोकतांत्रिक परंपराओं और संवैधानिक मूल्यों की मजबूत नींव का प्रतीक था। इसी ऐतिहासिक अवसर पर “जन गण मन” को आधिकारिक रूप से भारत का राष्ट्रगान घोषित किया गया, जिसने राष्ट्रीय एकता, अखंडता और सांस्कृतिक विविधता को स्वर दिया।
इस अवसर पर स्वामी जी ने भारत के गौरव सोमनाथ का स्मरण करते हुये कहा कि प्रथम राष्ट्रपति डा राजेन्द्र प्रसाद जी, 1951 में सोमनाथ मंदिर के पुनर्निर्माण व उद्घाटन के अवसर पर वहां गये थे। उस समय की सत्ता ने रोकने का भी प्रयास किया पर उनके संस्कार व संस्कृति सम्पन्न राष्ट्रपति श्री राजेन्द्र प्रसाद जी सोमनाथ गये और सोमनाथ आज भी उन संस्कारों की गाथा को कह रहा है।ं
इस भव्य आयोजन में श्री अनूप वाजपेयी जी, संपादक, अमर उजाला; श्री प्रवीण शर्मा जी, यूनिट हेड, अमर उजाला; प्रो. कमल घनशाला जी, अध्यक्ष, ग्राफिक एरा ग्रुप; श्री विनीत मिश्रा जी, मार्केटिंग हेड, अमर उजाला सहित अनेक गणमान्य अतिथियों की गरिमामयी उपस्थिति रही।
कार्यक्रम के दौरान श्री चक्र सम्मान, ज्योतिष तपस्वी सम्मान, लाइफटाइम अचीवमेंट अवार्ड के माध्यम से देशभर से पधारे वरिष्ठ एवं साधक ज्योतिषाचार्यों को सम्मानित किया गया। इसके साथ ही आयोजन के प्रायोजक एवं सहयोगी संस्थाओं का भी सम्मान किया गया, जिन्होंने सनातन ज्ञान के प्रचार-प्रसार में अपना अमूल्य योगदान दिया।
ज्योतिष महाकुंभ का यह संस्करण, विचार, चिंतन और साधना का संगम है। विभिन्न सत्रों में विद्वानों ने वैदिक ज्योतिष, खगोल विज्ञान, कर्म सिद्धांत, ग्रह-नक्षत्र विज्ञान, वास्तु और आध्यात्मिक दृष्टिकोण पर शास्त्रोक्त एवं वैज्ञानिक व्याख्यान प्रस्तुत किए। वक्ताओं ने इस बात पर विशेष बल दिया कि ज्योतिष का उद्देश्य मानव को आत्मनिर्भर, जागरूक और संतुलित बनाना है।
ग्राफिक एरा डीम्ड विश्वविद्यालय द्वारा प्रदान किया गया सुसज्जित और आधुनिक मंच इस आयोजन की गरिमा को और अधिक ऊँचाई प्रदान की। यह आयोजन इस बात का प्रमाण बना कि जब शिक्षा, मीडिया और आध्यात्म एक साथ आते हैं, तो समाज के लिए सार्थक और सकारात्मक संदेशों का सृजन होता है।
आठवाँ ज्योतिष महाकुंभ आने वाली पीढ़ियों के लिए यह संदेश है कि सनातन ज्ञान केवल अतीत की धरोहर नहीं, बल्कि वर्तमान और भविष्य का पथप्रदर्शक है। यह आयोजन ज्योतिष को अंधविश्वास से ऊपर उठाकर ज्ञान, विज्ञान और जनकल्याण के रूप में स्थापित करने की दिशा में एक सशक्त कदम सिद्ध होगा तथा भारतीय ज्योतिष परंपरा के स्वर्णिम अध्याय के रूप में स्मरणीय रहेगा।
इस अवसर पर आचार्य रमेश सेमवाल जी, आचार्या अनुराधा गोयल जी, आचार्य लेखराज जी, आचार्य अजय जी, आचार्य पुरूषोत्तम गोड़ जी, आचार्य लखन जी, आचार्य सुशील राज जी और अनेक आचार्यो और ज्योतिषाचार्यों ने किया सहभाग।
