*जिलाधिकारी प्रतीक जैन का स्पष्ट संदेश: धर्म की आड़ में किसी भी प्रकार की अराजकता, हिंसा अथवा अव्यवस्था को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा*
*त्रिभुवन चौहान, अनिल बैजवाल, राजेश बैजवाल सहित कुल 52 व्यक्तियों के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता की धारा 127, धारा 191(2), धारा 61, धारा 285 के साथ लोक संपत्ति को नुकसानी का निवारण अधिनियम के तहत दर्ज किया गया मुकदमा*
*अगस्त्य मुनि महाराज की ऐतिहासिक एवं पारंपरिक देवरा यात्रा के सफल, शांतिपूर्ण एवं सुव्यवस्थित संचालन हेतु जिला प्रशासन द्वारा सुनिश्चित की गई थी सभी आवश्यक व्यवस्थाएं*
अगस्त्यमुनि नगर में महर्षि अगस्त्य मुनि महाराज की ऐतिहासिक एवं पारंपरिक देवरा यात्रा के सफल, शांतिपूर्ण एवं सुव्यवस्थित संचालन हेतु जिला प्रशासन द्वारा पूर्व से ही समस्त आवश्यक व्यवस्थाएं सुनिश्चित की गई थीं। प्रशासन द्वारा मुनि महाराज की डोली को महर्षि अगस्त्य मंदिर से अगस्त्यमुनि सैंण स्थित गद्दीस्थल तक विधिवत एवं परंपरागत मार्ग से प्रवेश कराने के लिए समय रहते सभी प्रबंध पूर्ण कर लिए गए थे।
इसी दौरान कुछ अराजक तत्वों द्वारा धार्मिक परंपरा की आड़ लेकर जानबूझकर अव्यवस्था उत्पन्न करने का प्रयास किया गया। इन तत्वों द्वारा क्रीड़ा भवन के मुख्य द्वार को तोड़ दिया गया, जिससे न केवल सरकारी संपत्ति को क्षति पहुंची बल्कि नेशनल हाईवे-107 पर लगभग तीन से चार घंटे तक आवागमन बाधित रहा। इस कारण स्थानीय नागरिकों, यात्रियों एवं पर्यटकों को भारी परेशानियों का सामना करना पड़ा।
घटना को अत्यंत गंभीरता से लेते हुए जिलाधिकारी ने संबंधित सेक्टर मजिस्ट्रेट एवं पुलिस प्रशासन को ऐसे अराजक तत्वों को चिन्हित कर उनके विरुद्ध तत्काल कठोर कार्रवाई सुनिश्चित करने के निर्देश दिए हैं। जिलाधिकारी ने स्पष्ट किया कि मंदिर समिति के पदाधिकारियों से देवरा यात्रा के मार्ग को लेकर पूर्व में ही वार्ता कर ली गई थी तथा जिस पारंपरिक मार्ग से पूर्वकाल से देवरा यात्रा के दौरान डोली को प्रवेश कराया जाता था, उसी मार्ग पर प्रशासन द्वारा समुचित व्यवस्थाएं की गई थीं।
इसके बावजूद कुछ तत्वों द्वारा जबरन डोली को क्रीड़ा भवन अगस्त्यमुनि के मुख्य द्वार से ले जाने का दबाव बनाया गया तथा इसी उद्देश्य से क्रीड़ा भवन के मुख्य गेट को तोड़ा गया। इस दौरान सरकारी कार्य में बाधा डालने, शासकीय सेवकों के साथ अभद्र व्यवहार करने तथा कानून व्यवस्था को चुनौती देने के मामले भी संज्ञान में आए हैं।
जिलाधिकारी ने ऐसे कृत्यों को घोर अनुशासनहीनता एवं कानून व्यवस्था भंग करने का प्रयास बताते हुए संबंधित अधिकारियों को इसमें शामिल कुछ ‘रिपेटिटिव ऑफेंडर्स’ के ख़िलाफ़ गुंडा एक्ट सहित अन्य सुसंगत धाराओं में मुकदमा दर्ज करने के निर्देश दिए हैं। उन्होंने स्पष्ट कहा कि धर्म की आड़ में किसी भी प्रकार की अराजकता, हिंसा अथवा अव्यवस्था को कतई बर्दाश्त नहीं किया जाएगा और जनपद के शांतिपूर्ण माहौल को खराब करने के किसी भी प्रयास को सफल नहीं होने दिया जाएगा।
*इनके विरुद्ध दर्ज हुआ मुकदमा*
(1) त्रिभुवन चौहान पुत्र कुलदीप सिह निवासी देवर थाना गुप्तकाशी जनपद रूद्रप्रयाग
(2) अनिल बैजवाल पुत्र चक्रधर बैजवाल निवासी नाकोट अगस्त्यमुनि
(3) राजेश बैजवाल पुत्र भगवती प्रसाद निवासी उपरोक्त
(4) योगेश बैजवाल पुत्र अनुसुइया प्रसाद बैजवाल निवासी उपरोक्त
(5) शेखप नौटियाल पुत्र अनुसुइया प्रसाद नौटियाल निवासी सिल्ला बामण गांव अगस्त्यमुनि
(6) भानु चमोला पुत्र अज्ञात निवासी तिलवाडा अगस्त्यमुनि
(7) मिथुन सब्जी वाला निवासी अगस्त्यमुनि
(8) मकर लाल पुत्र अज्ञात निवसी फलई अगस्त्यमुनि
(9) हैप्पी असवाल पुत्र अज्ञात निवासी तिलवाडा अगस्त्यमुनि
(10) विपिन रावत पुत्र अज्ञात निवासी जखन्याल गांव अगस्त्यमुनि
(11) केशव अग्रवाल पुत्र अज्ञात निवासी जखन्याल गांव अगस्त्यमुनि
(12) प्रियाशु मोहन पुत्र अज्ञात निवासी तिलवाडा अगस्तयमुनि एंव 40 अन्य लोग
*निम्न धाराओं के तहत होगी कार्यवाही*
भारतीय न्याय संहिता की धारा 127 (सदोष परिरोध/Wrongful confinement), धारा 191 (2) (विधि विरुद्ध जमाव, धारा 61 (आपराधिक षड्यंत्र), धारा 285 (लोक मार्ग बाधित करना) के तहत विधिक कार्यवाही की जाएगी। साथ ही, लोक संपत्ति को नुकसानी का निवारण अधिनियम 1984 के तहत रिकवरी की जाएगी।
*जिलाधिकारी प्रतीक जैन ने कराईं सभी आवश्यक तैयारियां*
जिलाधिकारी ने यह भी बताया कि प्रशासन द्वारा महर्षि अगस्त्य मंदिर से अगस्त्यमुनि सैंण स्थित गद्दीस्थल तक पारंपरिक देवरा मार्ग पर विशेष ध्यान दिया गया था। यात्रा मार्ग पर साफ-सफाई, चूना डालकर मार्ग को समतल एवं सुचारु बनाना, श्रद्धालुओं की सुविधा हेतु आवश्यक प्रबंध, यातायात नियंत्रण तथा सुरक्षा व्यवस्था को पूरी तरह सुनिश्चित किया गया था, ताकि देवरा यात्रा श्रद्धा, शांति एवं परंपरागत मर्यादा के अनुरूप सम्पन्न हो सके।
जिला प्रशासन ने जनपदवासियों से अपील की है कि वे धार्मिक आयोजनों की गरिमा बनाए रखें, प्रशासन का सहयोग करें तथा किसी भी प्रकार की अफवाहों या अराजक गतिविधियों से दूर रहें। प्रशासन जनपद में शांति, कानून व्यवस्था एवं धार्मिक परंपराओं की रक्षा के लिए पूर्णतः प्रतिबद्ध है।
