*एशियन गेम्स 2026 में भारत की विजय को परमार्थ निकेतन की ओर से सभी खिलाडियों को अनेकानेक शुभकामनायें*
*पूज्य स्वामी चिदानन्द सरस्वती जी ने भारतीय खिलाड़ियों की गौरवपूर्ण उपलब्धियों हेतु बधाईयाँ दी*
*माँ गंगा की आज की आरती खिलाड़ियों की विजय को की समर्पित*

ऋषिकेश, 24 सितंबर 2026। एशियन गेम्स 2026 में भारतीय खिलाड़ियों द्वारा देश का गौरव बढ़ाने का सिलसिला निरंतर जारी है। खेल मैदान से लेकर जल की लहरों और लक्ष्यभेद की एकाग्रता तक, भारत के युवा खिलाड़ी अपने परिश्रम, अनुशासन, साहस और संकल्प से तिरंगे की शान बढ़ा रहे हैं। इन गौरवपूर्ण उपलब्धियों पर परमार्थ निकेतन, ऋषिकेश की ओर से समस्त भारतीय खिलाड़ियों को हार्दिक बधाई एवं शुभकामनाएँ अर्पित की गईं।
पूज्य स्वामी चिदानन्द सरस्वती जी ने आज की पावन गंगा आरती, एशियन गेम्स में भारत के लिए पदक जीतने वाले खिलाड़ियों और देश की युवा शक्ति को समर्पित करते हुए कहा कि जब कोई भारतीय खिलाड़ी अंतरराष्ट्रीय मंच पर तिरंगा लेकर खड़ा होता है, तब उसके साथ केवल एक खिलाड़ी नहीं, बल्कि 140 करोड़ भारतीयों की आशा, प्रार्थना और गौरव खड़ा होता है।
उन्होंने कहा कि “खेल केवल पदक जीतने का माध्यम नहीं, बल्कि स्वयं पर विजय प्राप्त करने की साधना है। खिलाड़ी हमें सिखाते हैं कि एकाग्रता, अनुशासन, तप, त्याग और निरंतर अभ्यास से असंभव को भी संभव बनाया जा सकता है। आज एशियन गेम्स में भारत का तिरंगा जिस ऊँचाई पर लहरा रहा है, उसके पीछे हमारे खिलाड़ियों की वर्षों की साधना और पूरे राष्ट्र की शक्ति है।”
पूज्य स्वामी जी ने कहा कि आज की गंगा आरती उन सभी भारतीय खिलाड़ियों को समर्पित है, जिन्होंने अपने उत्कृष्ट प्रदर्शन से भारत का मान बढ़ाया है। उन्होंने माँ गंगा से प्रार्थना की कि सभी खिलाड़ी स्वस्थ रहें, निरंतर आगे बढ़ें और अपने खेल तथा अपने संकल्प से आने वाली पीढ़ियों को प्रेरणा देते रहें।
शूटिंग के स्कीट मिश्रित टीम मुकाबले में परिनाज़ धालीवाल और अनंतजीत सिंह नरूका ने कांस्य पदक जीतकर भारत के पदक अभियान में एक और गौरवपूर्ण अध्याय जोड़ा। भारतीय जोड़ी ने फाइनल में 44 अंक हासिल कर पोडियम स्थान प्राप्त किया।
परमार्थ निकेतन की ओर से दोनों खिलाड़ियों को बधाई देते हुए कहा गया कि लक्ष्य पर केंद्रित दृष्टि और मन की एकाग्रता ही सफलता की आधारशिला है। उनका यह प्रदर्शन देश के उन लाखों युवाओं के लिए प्रेरणास्रोत है जो अपने सपनों को साधना और परिश्रम से साकार करना चाहते हैं।
भारत की नाओरेम रोशिबिना देवी ने महिला 60 किग्रा सांडा स्पर्धा में रजत पदक जीतकर देश को गौरवान्वित किया। यह उनकी लगातार तीसरी एशियन गेम्स पदक उपलब्धि है।
पूज्य स्वामी जी ने रोशिबिना देवी को शुभकामनाएँ देते हुए कहा कि सच्चा योद्धा वही है जो हर परिस्थिति में अपने संकल्प को जीवित रखे। उनकी यात्रा साहस, अनुशासन और आत्मविश्वास की प्रेरक कहानी है।
रोइंग के पुरुष डबल स्कल्स में सतनाम सिंह और सलमान खान ने कांस्य पदक जीतकर भारत को गौरवान्वित किया। दोनों ने फाइनल में इस स्पर्धा में भारत का पहला एशियन गेम्स पदक हासिल किया।
पूज्य स्वामी जी ने कहा कि जल पर उनकी गति और लय केवल खेल की सफलता नहीं, बल्कि यह संदेश भी है कि जब दो संकल्प एक दिशा में, एक लय में और एक लक्ष्य के साथ आगे बढ़ते हैं, तो विजय की धारा स्वयं मार्ग बनाती है।
उन्होंने खिलाड़ियों के परिश्रम की सराहना करते हुए कहा कि भारत के खिलाड़ी आज दुनिया को यह संदेश दे रहे हैं कि भारत की युवा शक्ति में सामर्थ्य भी है, संस्कार भी हैं और संकल्प भी है।
पूज्य स्वामी जी ने कहा कि भारत के लिए खेल केवल प्रतिस्पर्धा नहीं, बल्कि चरित्र निर्माण और राष्ट्र निर्माण की साधना हैं। मैदान पर खिलाड़ी जिस अनुशासन, धैर्य और आत्मसंयम का परिचय देते हैं, वही गुण जीवन के प्रत्येक क्षेत्र में सफलता की नींव बनते हैं।
उन्होंने देश के अभिभावकों और युवाओं से आह्वान किया कि बच्चों को केवल परीक्षा और करियर तक सीमित न रखें, बल्कि उन्हें खेल, योग, ध्यान, सेवा और संस्कार से भी जोड़ें। स्वस्थ शरीर, शांत मन और मजबूत चरित्र ही एक सशक्त राष्ट्र का निर्माण करते हैं।
परमार्थ निकेतन माँ गंगा के पावन तट से आज प्रार्थना की गई कि भारत का तिरंगा विश्व के हर खेल मैदान में गौरव के साथ लहराता रहे, भारतीय खिलाड़ियों की प्रतिभा को नई ऊँचाइयाँ मिलें और उनकी विजय से देश के करोड़ों युवाओं में स्वस्थ जीवन, अनुशासन, खेल भावना और राष्ट्रसेवा की प्रेरणा जागृत हो।

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