*विश्व स्वास्थ्य दिवस*

*एक स्वस्थ राष्ट्र का निर्माण तभी संभव है जब स्वास्थ्य सेवाएँ सभी के लिए सुलभ और सशक्त हों*

*आहार ही है आधार*

*“स्वस्थ तन, प्रसन्न मन और जागृत चेतना” ही वास्तविक समृद्धि*

*स्वामी चिदानन्द सरस्वती*

ऋषिकेश, 7 अप्रैल। विश्व स्वास्थ्य दिवस के पावन अवसर पर परमार्थ निकेतन से पूज्य स्वामी चिदानन्द सरस्वती जी ने सभी नागरिकों को उत्तम स्वास्थ्य, सुख एवं समृद्धि की शुभकामनाएँ देते हुये कहा कि “स्वास्थ्य ही जीवन का वास्तविक धन है” और एक स्वस्थ व्यक्ति ही एक सशक्त, समृद्ध एवं संतुलित समाज का निर्माण कर सकता है।

परमार्थ निकेतन में आयोजित श्रीमद् भागवत कथा के दौरान पूज्य स्वामी जी ने विश्व स्वास्थ्य दिवस पर संदेश दिया कि शुद्ध आहार, संतुलित विचार और संयमित जीवन ही सच्चा स्वास्थ्य है।

पूज्य स्वामी जी ने कहा कि अच्छा स्वास्थ्य केवल रोगों का न होना ही नहीं, बल्कि शारीरिक, मानसिक, भावनात्मक और आध्यात्मिक संतुलन की अवस्था है। आज की तेज रफ्तार जीवनशैली में लोग अपने स्वास्थ्य के प्रति सजगता खोते जा रहे हैं, जिसके कारण अनेक जीवनशैली से जुड़ी बीमारियाँ बढ़ रही हैं। ऐसे समय में यह आवश्यक है कि हम अपने जीवन में संतुलन लाएँ और स्वास्थ्य को प्राथमिकता दें।

उन्होंने कहा कि “आहार ही है आधार” शुद्ध, सात्त्विक और संतुलित आहार हमारे शरीर और मन दोनों को पोषण देता है। इसके साथ ही नियमित योग, प्राणायाम और ध्यान को अपने दैनिक जीवन का हिस्सा बनाना अत्यंत आवश्यक है। योग केवल व्यायाम नहीं, बल्कि जीवन जीने की एक समग्र पद्धति है, जो हमें आंतरिक शांति और बाह्य संतुलन प्रदान करती है।

इस अवसर पर पूज्य स्वामी जी ने कहा कि एक स्वस्थ राष्ट्र का निर्माण तभी संभव है जब स्वास्थ्य सेवाएँ सभी के लिए सुलभ और सशक्त हों। उन्होंने सरकार, समाज और प्रत्येक नागरिक से आह्वान किया कि वे मिलकर एक ऐसे स्वास्थ्य तंत्र के निर्माण में योगदान दें, जिसमें हर व्यक्ति को गुणवत्तापूर्ण चिकित्सा सुविधा उपलब्ध हो सके। विशेष रूप से ग्रामीण और वंचित क्षेत्रों में स्वास्थ्य सेवाओं की पहुँच सुनिश्चित करना समय की सबसे बड़ी आवश्यकता है।

विश्व स्वास्थ्य दिवस के अवसर पर परमार्थ निकेतन ने सभी स्वास्थ्य कर्मियों, डॉक्टरों, नर्सों, पैरामेडिकल स्टाफ और सेवा में लगी विभूतियों के प्रति गहरी कृतज्ञता व्यक्त करते हुये कहा कि ये वे लोग हैं जो दिन-रात निस्वार्थ भाव से मानवता की सेवा में समर्पित रहते हैं। विशेषकर वैश्विक चुनौतियों और महामारी के समय में उनका योगदान अमूल्य रहा है। उनका समर्पण हमें प्रेरित करता है कि हम भी अपने स्तर पर समाज के कल्याण के लिए कार्य करें।

स्वास्थ्य केवल व्यक्तिगत जिम्मेदारी नहीं, बल्कि सामूहिक दायित्व है। हमें अपने परिवार, समाज और पर्यावरण के स्वास्थ्य का भी ध्यान रखना होगा। स्वच्छता, पौष्टिक आहार, स्वच्छ जल और शुद्ध वायु ये सभी एक स्वस्थ जीवन के महत्वपूर्ण आधार हैं। “स्वस्थ तन, प्रसन्न मन और जागृत चेतना” ही वास्तविक समृद्धि का मार्ग प्रशस्त करते हैं।

हम अपने बच्चों और युवाओं को स्वास्थ्य के प्रति जागरूक बनाएं। उन्हें डिजिटल जीवनशैली के साथ-साथ प्रकृति से जुड़ने, खेलकूद में भाग लेने और मानसिक संतुलन बनाए रखने के लिए प्रेरित करें। एक स्वस्थ युवा ही देश का उज्ज्वल भविष्य सुनिश्चित कर सकता है।

आइए इस विश्व स्वास्थ्य दिवस पर यह संकल्प लें कि हम स्वयं स्वस्थ रहेंगे और दूसरों को भी स्वस्थ रहने के लिए प्रेरित करेंगे। आइए, हम सभी मिलकर एक ऐसे स्वस्थ, जागरूक और समृद्ध समाज का निर्माण करें, जहाँ प्रत्येक व्यक्ति का स्वास्थ्य और कल्याण सर्वोच्च प्राथमिकता हो। कथा व्यास श्री अल्पेश दबे जी, सूरत और कथा यजमान श्रीमती विपिला जी, श्री हर्ष भाई, श्री तुलसी भाई मावाणी, श्रीमती भावना बेन भिकड़िया एवं सर्व कथा परिवार सूरत आनंद के साथ कथा श्रवण कर रहे हैं।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *